Water purification filtration in hindi

Water purification -

पानी का शुद्धिकरण करने के लिए  जितने भी रासायनिक पदार्थ मिलाये जाते है जिससे उसमे से सभी विषैले जीवाणु मर जाये और पानी उदासीन हो जाए इस प्रक्रिया को शुद्धिकरण purification कहते हैं। इसका अर्थ पानी को साफ करना है ।
water purification filtration in hindi



Water filtration-

अब फिल्ट्रेशन का हिंदी में अर्थ है छानने का काम । मतलब जब पानी मे मिट्टी , गंदगी होती है तो उन गन्दगी को पानी से अलग किया जाता है जिससे गंदगी और मिट्टी आदि बाहर निकल जाए इस क्रिया को फिल्ट्रेशन कहते हैं।




Water purification filtration में  नवीनतम प्रक्रिया-

इसमे तीन प्रकार का उपचार किया जाता है 
1.भौतिक उपचार 
2. जैविक उपचार
3. रासायनिक उपचार

1. भौतिक उपचार -

भौतिक उपचार में भौतिक(प्राकृतिक) प्रक्रिया को अपनाते है । 
1. जल को पहले छान लेते हैं 
2. इसमे मिट्टी आदि को अलग किया जाता है ।
3. इस प्रदूषित जल को खुले स्थान पर इकट्ठा कर लेते हैं जिससे इसकी गंध कम हो जाए।

धीमा फिल्ट्रेशन प्रक्रिया (Slow filtration process)-

इस प्रक्रिया में सबसे पहले एक टैंक होता है जिसमे रेत के कण को टैंक में डाला जता है और इसके ऊपर परम्यूटीट से कठोर जल को गुजारा जाता है । 
(i) रेत में मिट्टी, कंकण, लाइम , कार्बनिक पदार्थ आदि नही होने चाहिए।
(ii) इसमे रेत का आकार  लगभग एकसमान होना चाहीए।
(iii) रेत का आकार 0.3-0.5मिलीमीटर तक होना चाहिए।
(iv) वह रेत का कठोरता और प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होना चाहिए।
(v) उस रेत को हैड्रोलिक एसिड में 20 -25घण्टे रखने पर उसका वजन 5% से कम ना हो ।


जैविक प्रक्रिया-

जैविक प्रक्रिया किसे कहते है इसका क्या अर्थ है-

जैविक का अर्थ है 'जीव से सम्बंधित' अर्थात जिसमे जीवाणु ,वैक्टीरिया आदि होते है । जैसे जैविक खेती में जैविक खाद का इस्तेमाल होता है। जिस खाद में लाभदायक वैक्टीरिया तथा जीवाणु उपस्थित रहते है जो खेत के पैदावार को बढ़ाते हैं।

Water purification filtration में जैविक प्रक्रिया - 

इस प्रक्रिया में जल में उपस्थित बैक्टीरिया तथा जीवाणु को खत्म करने की प्रक्रिया को जैविक प्रक्रिया कहते है । 

जैविक प्रक्रिया तथा रासायनिक प्रक्रिया में बहुत ही थोड़ा अंतर है ।
जहाँ जैविक प्रक्रिया में जीवाणुओं और बैक्टीरिया को नष्ट किया जाता है वही रासायनिक प्रक्रिया में जल में उपस्थित विषाणुओ, गंध, आदि को दूर करने के लिए किया जाता है। 

परम्यूटीट-

यह एक प्रकार का जियोलाइट है जो पानी को नरम मतलब मृदु जल में बदलने के लिए किया जाता है। इसका रासायनिक सूत्र     Na2Al2Si2O8  है । इसमें सोडीयम एल्युमीनियम सिलिकॉन आदि का मिश्रण होता हैं। 

Water purification filtration में कठोर जल क्या है-

कठोर जल का सूत्र CaCo3 होता है । जो 1 लीटर पानी मे CaCo3 के 60-200 mg तक कण होता है । या दूसरे शब्दों में कहे तो खनिज लवणों वाला जल कठोर जल कहलाता है।

मृदु जल क्या है -

इसमे खनिज लवणों की उपस्थिति बहुत ही कम हो जाती हैं 15 mg से कम ही रहता है जिसे मृदु जल कहते हैं । 

RO का full form क्या है -

RO-Reverse Osmosis (विपरीत परासरण) 


TDS का full form क्या है-

TDS-  Total dissolved solid (सम्पूर्ण अघुलनशील कण) 




पीने के जल का TDS क्या है इसे कैसे मापा जाता है-

 TDS जल की शुद्धता बताने की एक मापन विधि है जिससे जल कितना शुद्ध है मालूम हो जाता है । इसे PPM (Part Per Million) में मापा जाता है ।


जल का ppm कैसे ज्ञात किया जाता है (How to find out value of Water Quality)-

किसी जल  के एक मिलियन(दस लाख) ग्रामों अर्थात 10^6 g में उपस्थित अघुलनशील कणों की संख्या , जल की ppm कहलाती है । 

शुद्ध जल का TDS 400 से नीचे रहे तो अच्छा माना जाता है । 

जैसे- किसी जल में अशुद्ध कणों की संख्या 400 है 
जो कि उसके 1000 लीटर में है अर्थात 1000000 g जल में 400 parts मौजूद है । 

**इसे ज्ञात करने के लिए सबसे पहले जल का BOD निकाला जाता है । इसके बाद ppm को हम ज्ञात कर सकते हैं जो नीचे वर्णन किया गया है



रासायनिक प्रक्रिया-

रासायनिक प्रक्रिया में जल को रंगहीन, गंधहीन , विषाणु से मुक्त जल बनाने के तरीकों को अपनाया जाता है । जो निम्न है । 
1. क्लोरीनीकरण या (Disinfection)- 
इस प्रक्रिया में क्लोरीन गैस का इस्तेमाल किया जाता है जो जल में से गंध को दूर करता है और रंगहीन बनाता है। 


यह सभी प्रक्रिया बहुत ही खराब जल को शुद्ध करने में किया जाता है । 

Water purification filtration में पीने के पानी का शोधन-  

इस प्रक्रिया में जल नार्मल जल होता है जिसे साफ किया जाता है और उसमें सभी  खनिज(Mineral) को नष्ट कर दिया जाता है 

1. (छानने का कार्य)  Filtration-

इस क्रिया में एक टैंक में  रेत(sand) के कण भरे होते है जिसमे से जल को गुजारा जाता है ।और उसमें से मिट्टी ,कंकण, आँख से दिखाई देने वाले जीवाणु आदि सभी अलग हो जाता है । जिसे water filtration कहते हैं। 

2.ओजोनिसशन( Ozonisation)-

Water purification filtration  में ozonation की प्रक्रिया को तब लगाया जाता है जब जल iol में मतलब जल में रासायनिक पदार्थ  मिले हो तब इस प्रक्रिया को लगाया जाता है । इसमे O3 गैस जो कि ओजोन गैस है को प्रवाहित किया जाता है । 

3. विपरीत परासरण( Reverse Osmosis, RO)-

दोस्तो RO एक मशीन है इसमें फिल्ट्रेशन ट्यूब, कार्बन ट्यूब, UV , UF,MF तथा water membranes ट्यूब से मिलकर बना होता है । 

Water purification filtration में water purify machin का नाम RO क्यो है ?

Water machin का नाम RO इसलिए रखा गया है क्योंकि यह इन सभी ट्यूबों के एक ओर से दूसरी ओर परासरण करके जाता है । और यह क्रिया इन सभी ट्यूबों में एक समान तरीके से होता है इसलिए इसका नाम reverse Osmosis रखा गया है। 

 RO में परासरण क्या है -

water purification filtration in hindi


परासरण का अर्थ है एक स्थान से दूसरे स्थान को जाना होना । चित्र में परासरण को देखे।
परासरण क्रिया में एक झिल्ली(membrane) होता है यह झिल्ली जल के कणों(विलायक)  को अपने झिल्ली से आर-पार जाने देता है लेकिन उसमें उपस्थित अशुद्धि(विलेय के कण) को रोक देता है । नही जाने देता है। 

Water फ़िल्टर ट्यूब को इसी परासरण झिली से बनाया जाता है । जिसमे से पानी  छन जाता है लेकिन अशुद्धि अलग रह जाता है । 

4. कार्बन फिल्ट्रेशन(Carbon Filtration)-

कार्बन फिल्ट्रेशन में कोयले के कण होते है जो पानी की गंध , रासायनिक तत्व जो पानी मे होते है उनको नष्ट कर देता है और उसमें थोड़ा बहुत मिट्टी बचा रह गया हो तो उसे भी अलग कर देता है और पानी को शुद्ध बनाने में सहायता करता है। 

5. अल्ट्रावॉयलेट किरण  (Ultraviolet Rays, UV)

Water purification filtration में अल्ट्रा वायलेट किरण को पानी मे प्रसारित किया जाता है । अल्ट्रावायलेट किरण सूक्ष्म जीवों(Micro-Organisms) , जीवाणु और वैक्टीरिया को मार देती है और उसमें सभी आवश्यक सभी खनिज लवण उपस्थित रहते हैं।

6. अल्ट्रा फिल्ट्रेशन( Ultrafiltration , UF)-

अल्ट्रा फिल्ट्रेशन में अल्ट्रा वायलेट द्वारा मरे जीवाणु, वैक्टीरिया को छानकर अलग कर देता है । 

7. माइक्रो फिल्ट्रेशन (Microfiltration , MF)-

माइक्रो फिल्ट्रेशन में जल में उपस्थित माइक्रो पार्टिकल (Microparticals) को छानकर अलग कर देता है जिससे जल 99.9%एकदम शुद्ध हो जाता है और वह पीने योग्य हो जाता है ।



Water purification Filtration में पीने के पानी की गुणवत्ता के भारतीय मानक -

जल ऐसा हो जिसमें आवश्यक खनिज मौजूद हो तथा जल रासायनिक रूप से शुद्व हो । पेय जल में निम्न गुण होने चाहिए।

1. पेय जल स्वच्छ ,पारदर्शी ,रंगहीन ,गन्धहीन तथा स्वादहीन         होना चाहिए। 
2. रासायनिक जीवाणुओं , बैक्टीरिया तथा विषाणुओं से मुक्त      होना चाहिए ।
3. खनिज लवणों से परिपूर्ण होना चाहिए।
4. इसे न अधिक मृदु और न अधिक कठोर होना चाहिए। 
5. अपद्रव्य(waste खराब) से  मुक्त होना चाहिए।
6. जल का तापमान 4℃-10℃ तक होना चाहिए।
7. पाइपों या पात्रो से किसी प्रकार की अभिक्रिया नही करनी          चाहिए।
8. अधिक समय तक रखने पर ताजा रहना चाहिए।

पेय जल की गुणवत्ता के मानक 

Water purification filtration में पेय जल की गुणवत्ता निम्न हैं।

ph      6.5-8.5                       कठोरता   300

BoD    20mg/L                   कैल्शियम(Ca)  75mg/L

मैग्नीशियम (Mg)   30mg/L      लोहा(Fe)      3 mg/L

क्लोराइड(Cl)    250mg/L    सल्फेट (So4)     150mg/L

नाइट्रेट(No3)       45mg/L

पानी की अशुद्धता की डिग्री क्या है (Degree of impurity of water)-

पानी की अशुद्धता को एक डिग्री के तहत मापा जाता है कि उस जल की गुणवत्ता(quality) कितनी है । इस माप क्रिया का नाम है
 जैव रासायनिक ऑक्सिजन आवश्यकता(BOD- Bio-Chemical Oxygen Demand) 

Water purification Filtration में BOD क्या है


एक प्रदूषित जल है जिसमे जीवाणु और बैक्टीरिया आदि होंगे जो जैव जीवाणु(Micro-organism) है । जिन्हें ऑक्सिजन की आवश्यकता होती है । यह जल में जीवाणु जितना ऑक्सिजन को ले लेता है ।उस ऑक्सिजन को ही BOD कहते है जिसे percentage % में दिखाते है ।

BOD की परिभाषा(Difinition of BOD)-

निश्चित प्रदूषित जल तथा निश्चित समय तथा तापमान में माइक्रो जीवाणुओं द्वारा अवशोषित किया गया ऑक्सिजन उसका प्रदूषित जल का BOD कहलाता है। 

BOD Of Water%= अवशोषित ऑक्सिजन/ कुल प्रदूषित जल का आयतन

 BOD कैसे ज्ञात करते है (How to find out BOD )-

water purification filtration in hindi








माना 
1. सबसे पहले जल ले 10 liter
2. और 4 दिन समय 
3. निश्चित तापमान 20℃ 
4. उसमे 2kg ऑक्सिजन दिया जाए


20℃temperature पर 10 liter जल में 2 kg ऑक्सिजन को बाहर से दिया गया और उसे 4 Days तक छोड़ दिया गया । उसके बाद कि प्रक्रिया-

माना जल के जीवाणु(Micro-Organism)  ने 0.6g oxygen लिया 

BOD of Micro-organism %= 0.6g×100/ 10×1000g
                  
=   .006% 

How to find ppm-

सबसे पहले BOD में अवशोषित ऑक्सिजन और जल के मान लेंगे

TDS= अवशोषित ऑक्सिजन×10^6 / जल का आयतन

TDS=0.6g×10^6/10000

     जल का TDS    = 60 ppm

10 litre जल का TDS  है 60 ppm (Parts Per Million) 


रासायनिक ऑक्सीजन आवश्यकता(COD-Chemical Oxygen Demand)-

इस प्रक्रिया का प्रयोग भी पानी की गुणवत्ता को बताने के लिए किया जाता है लेकिन यह कुछ अलग है । 

इस जल में   रासायनिक पदार्थ  का प्रयोग किया जाता है जो जल उपस्थित जैविक कचरा( Organic waste) को खत्म करने के लिए जितना बाहर से ऑक्सीजन को सोखता है उस ऑक्सीजन को ही हम COD chemical Oxygen Demand कहते है । 

इसमे एक रसायन है जिसका नाम पोटैशियम डाइक्रोमेट(K2Cr2O7) है । यह क्रिया बहुत जल्दी हो जाती है केवल 2 घंटे का समय लेता है । यह पोटैशियम डाइक्रोमेट एक ऑक्सीकरण की तरह कार्य करता है।

इसमे सांद्र   सल्फ्यूरिक एसिड(H2So4) और आसवित जल (Distilled water ) लगते है । 

आसवित जल (Distilled water)-


भाप में जो जल के बूंद होते है उन्ही को ठंडा करने पर जो जल प्राप्त होता है उसे आसवित जल (distilled water)
कहते है ।