ब्रम्हांड की उत्पत्ति कब हुई थी हिंदी में- Bramhand ki utpatti kab hui thi in hindi step by step

ब्रम्हांड(Universe) की उत्पत्ति का कब हुई यह बात किसी को नही पता है । लेकिन एक अनुमान तथा कुछ प्रयोगों से यह फिक्स हुआ कि इसकी उत्पत्ति आज से 15 अरब वर्ष पहले हुआ था । लेकिन ब्रम्हांड में ऐसे अरबो तारे है जो स्वंय के प्रकाश से जलते रहते हैं । ब्रम्हांड का कोई अंत नही है । क्योंकि नासा स्पेस सेंटर से छोड़ा गया वोयेजर satellite अभी भी ब्राह्मण में जा रहा है । आज से 47 वर्ष पहले छोड़ा गया था । 
Bramhand ki utpatti kab hui thi in hindi step by step


वोयेजर पृथ्वी से 20 करोड़ किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर है जो अभी भी सफर को तय कर रहा है।

सूर्य की सतह  का तापमान 5000-6000℃ है । जबकि उसके वातावरण का तापमान 2करोड़ ℃ तक का है । सूर्य का परिक्रमा करने का समय 25 करोड़ है जिसे ब्रम्हांड वर्ष के नाम से जानते है । 

परिक्रमण काल - जब सूर्य किसी दूसरे पिंड का चक्कर लगाए ,तो उस 1 चक्कर मे लगा समय परिक्रमा समय या परिक्रमण काल कहते है ।



सूर्य की उत्पत्ति कैसे हुई (How did the sun originate)-

सूर्य अब तक के ज्ञात ग्रहों का केंद्र बिंदु है । जिसका जन्म 4.5 अरब वर्ष पहले माना जाता है।  जहाँ सूर्य है वहाँ पहले नेबुला(Nebulas) मैटेरियल था । इस नाब्युला मैटेरियल में धूल और गैस का मिश्रण है इसमें सबसे ज्यादा हाइड्रोजन और हीलियम जैसे तत्व मौजूद है । इसका व्यास 13लाख 90 हजार किलोमीटर है । यह पृथ्वी से 109 गुना बड़ा है । 

इससे सम्बंधित कई सिद्धांत (Theory) दिया गया लेकिन 1755 में जर्मन खगोलशास्त्र इमैनुएल कांट  के नेबुला थ्योरी को स्वीकारा गया । जिसमें बताया गया कि ब्रम्हांड में नेबुला मैटेरियल बहुत अधिक थे। और उसके आस-पास सुपरनोवा रहे होंगे । जिसके कारण से सूर्य की किरणें बहुत प्रभावित हुई और गुरुत्व के कारण पास पास आ गयी और अपने धुरी पर चक्कर काटने लगे । 

सूर्य गैस का गोला है लेकिन  इसमे प्लाज्मा भी है  ।इस गैस के गोले में हाइड्रोजन 74%, हीलियम 24% तथा 2%में लोहाFe, निकिल Ni, ऑक्सीजन O, सल्फरS, मैग्नेशियम Mg, कार्बन C , सिलिकॉन Si, कैल्शियम Ca आदि तत्व मौजूद है । 

सूर्य प्रकाश कैसे पैदा करता है -

सूर्य नाभिकीय संलयन पर कार्य करता है। जिसमे हाइड्रोजन का भागीदारी होता है । हाइड्रोजन के समस्थानिक(Isotope) ड्यूटेरियम तथा ट्राईटेरियम  के संयोग से एक नए तत्व का निर्माण होता है जिसका नाम हीलियम है । 

समस्थानिक (Isotope) क्या है -

जिसका परमाणु क्रमांक समान तथा परमाणु भार भिन्न होता है उसे समस्थानिक कहते है । 

 2 H + 3H ----> He +N  (1MeV )

1MeV- मेगा इलेक्ट्रॉन वोल्ट की एनर्जी ।
e-electrone, p-protan, n- neutran

इसमे ड्यूटेरियम के 2 परमाणु भार है जिसमे 1e, 1p,1 n है तथा ट्राईटेरियम में 1e,1p  तथा 2n है जब यह आपस मे मिलते हैं तो 1 न्यूट्रॉन n को बाहर कर देते है और हीलियम(He) का निर्माण कर देते हैं।  इसप्रकार जितने अधिक ड्यूटेरियम और ट्राईटेरियम आपस मे मिलेंगे उतनी ही अधिक ऊर्जा बनता है । 

इसी प्रकार सूर्य बहुत गर्म हो जाता है और he को अंतरिक्ष मे छोड़ देता है । इसी लिए अंतरिक्ष में हीलियम की मात्रा अधिक है। 

हाइड्रोजन बम इसी क्रिया पर बनाया गया है जो पूरी दुनिया को तबाह करने में सक्षम है । 
नाभिकीय ऊर्जा पैदा करने वाले विद्युत गृह में इसका प्रयोग करके विजली बनाया जाता है । और नाभिकीय खण्डन से भी बनाया जाता है जिसमे एक तत्व दो तत्वों में टूटता है। तो ऊर्जा बनाता है । 
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सुपरनोवा क्या होता है (what is supernova)-

जब दो तारे आपस मे टकराकर भयंकर विस्फोट करती है तो उसे सुपरनोवा कहते है । महानोवा , जब बहुत ही बड़े तारे आपस मे बहुत बड़ा विस्फोट करते है तो उसे महानोवा कहते है । 

नेबुला किसे किसे कहते है -

ब्रम्हांड में धूल और गैस के मिश्रण को नाब्युला कहते  है । 

प्लाज्मा क्या है -

प्लाज्मा आयनिक गैसों का समूह है जिसमे इलेक्ट्रॉन और प्रोटान मौजूद होते है जो किसी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करता है । 


सूर्य से ग्रहों उपग्रहों की उत्पत्ति (Origin of planetary satellites from the sun)-

अरबों वर्ष पहले सूर्य ब्रम्हांड का केंद्र विंदु था । जिसकी आयु 5 अरब वर्ष है ।  सूर्य अपने  धुरी अर्थात अपने केंद्र पर घूमता है । उस समय सूर्य  ब्रम्हांड में मौजूद हो चुका था । जब कोई आग का गोला सूर्य से टकराया तो सूर्य की घूमती कठोर गैस उसे तोड़कर अलग-अलग भागो में कर देती है । और इससे कई ग्रहों तथा क्षुद्र ग्रहों का निर्माण होता है ।


पृथ्वी का जन्म-

जिसमे पृथ्वी भी है । जो पहले आग का गोला था । लेकिन ब्रम्हांड में  और कई ग्रह थे जो सूर्य से बहुत दूर होने के कारण बहुत ही जल्दी ठंड हो गए । लेकिन पृथ्वी  सूर्य से उतना दूर नही की वह ठंडा हो जाता। यदि आ सूर्य को हटा दिया जाये तो पूरा सूर्यमण्डल बर्फ  में बदल जायेगा।
सूर्य में  आयनिक शक्ति होने के कारण इसमे ग्रेविटेशनल फोर्स उत्पन्न हुआ जो ग्रहों को अपनी ओर आकर्षित करते है । और ग्रह सूर्य का चक्कर लगाने लगते  है ।



पृथ्वी पर पानी कहाँ से आया-

पृथ्वी आग का गोला था । उस समय अंतरिक्ष में धूल के बादल थे जिसमें हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन का मिश्रण था। जहाँ से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के अणु मिलकर पानी का निर्माण करते है यह अंतरिक्ष मे मौजूद था । जो अचानक पृथ्वी पर गिरा और पानी का अथाह सागर बहने लगा । लेकिन इन बदलो में इतना पानी नही था जो समुद्र को भर सके हो । लेकिन कई सारे एस्टेरोइड (asteroid - छोटातारा)  के टकराने से भी पानी आया । एस्टेरोइड में 20% पानी होता है जब उसे जलाया जाता है । इसप्रकार लाखों की संख्या में एस्टेरोइड टकराये होंगे । और इसमे से रासायनिक विधि से पानी मिला ।

समुद्र का पानी खारा कैसे हुआ-

जब पृथ्वी पर पानी आया तो तुरंत वाष्प में बदल कर बादल बनते और धरती पर बरसने लगे इसी तरह लाखों बार क्रियाये हुई । कई वर्षो बाद जीव वनस्पति तथा पहाड़ो का निर्माण हुआ । उस समय से अब तक समुद्र से शुद्ध पानी वाष्पित होकर स्थल भागों में बरसता जिससे वायुमण्डल में SO2,CO2,N2O से मिलकर पानी को थोड़ा खारा बना देती जो नदियों में जाता है । लेकिन यह उतना पता नही चल पाता है ।

फिर यही पानी चट्टानों से होते हुए समुद्र में जाती है । चट्टानों में भी जो रासायनिक तत्व होते हैं वह भी इसे खरा करते हैं इसप्रकार इनका पानी समुद्र में नमक को इकट्ठा करता रहता है । यह क्रिया बहुत बार होती  है । और समुद्र के अंदर Na और Cl होते हैं जिनके मिलने से समुद्र का पानी खारा होता जाता है । साथ ही साथ ज्वालामुखी से भी भी उसमे SO2, CO2, Na, Cl आदि कई तत्व सामिल होते हैं । इन सभी प्रकार  से समुद्र का पानी खारा होता जाता है ।