वन्यजीव अभ्यारण का अर्थ ( vanyjiv abhyarany ka arth)

वन्यजीव(wildlife)-

जो  जीव जंतु जंगलो में निवास करते है उन्हें वन्यजीव  कहते है वन्यजीव का अर्थ ही है वन के जीव । इसप्रकार ये जन्तु पालतू नही होते है । 
Vanyjiv abhyarany ka kya arth hai in hindi


अभ्यारण (sanctuary)-

अभ्यारण का अर्थ होता है बिना भय के विचरण करना ।  अभय (बिना डर के) +अरण्य( जंगल ,वन) = अभ्यारण ।
अभ्यारण का क्षेत्र बहुत बडा होता है जिसमे जीव-जंतुओं को छोड़ दिया जाता है । इसमे कोई दिवार या लोहे के काटे का बाड़ा बजी नही बनाया जाता है क्योंकि इसका क्षेत्र  समतल या कम नही है । इसलिए इसके चारों तरफ चार दीवारी बनाना मुश्किल है । 
इसप्रकार  यहाँ से  जन्तु तथा जन्तु आस-पास के गाँवो आदि में भी चले जाते हैं । जिससे जान-माल की हानि होती है ।


अभ्यारण्य और राष्ट्रीय उद्यान में अंतर

1.  अभ्यारण्य जँगलो का बहुत बड़ा विस्तृत क्षेत्र होता है । 
1. राष्ट्रीय उद्यान (National Park)  एक छोटा जँगलो का क्षेत्र होता है इसमें राज्य सरकार बराबर देख रेख कराती है ।

2. अभ्यारण्य में जंगल खुले रहते है जिससे जानवर गाँव इलाके में भी चले जाते है । यह अपना भोजन का जुगाड़ स्वयं करते हैं।
2. उद्यान चारों तरफ से दीवारों से घिरा होता है और इन्हें बराबर भोजन दिया जाता है । 

3.अभ्यारण्य जँगलो में मानव भी जा सकते है लेकिन अभ्यारण्य के छोर पर चेतावनी बोर्ड होता है जिसपर सभी खतरे सम्बंधित बातें लिखी होती है ।

3.उद्यान में दीवार होने के कारण कोई खतरा नही होता है । यह एक प्रकार से चिड़ियाघर की तरह ही होता है । इसमें आदमी टिकट से घूमने जाता है । 


4.राष्ट्रीय उद्यानों को राज्य सरकार विकसित करती है जिसमे जानवर रह सके।
4. अभ्यारण्य के लिए कोई खास विकास नही कराया जाता है । इनमे ngt के गार्ड लगे होते है जो समय-समय पर देख भाल करते रहते हैं।

भारत के वन्यजीव  अभ्यारण्य (Bharat ke vanyjiv abhyarany)-

भारत मे कुल वन्यजीव अभ्यारणों की संख्या 544 है ।भारत में सबसे बड़ा अभयारण्य जंगली गधा अभ्यारण्य है जो गुजरातके स्थित है।
कुछ प्रमुख अभ्यारण्यों के नाम दिए गए है ।


Vanyjiv abhyarany ka kya arth hai in hindi


*ज्यादातर शेर और बाघ को सुरक्षित करने के लिए सबसे ज्यादे अभ्यारणों और राष्ट्रीय उद्यानों का विकास किया गया।

1. जिम कॉर्बेट अभ्यारण्य (उत्तराखंड)-

जिम कॉर्बेट यह एक प्रकार का नेशनल पार्क है लेकिन यह वास्तव में अभ्यारण्य है । इसका नामकरण जिम कॉर्बेट के नाम पररखा गया है। 
क्योंकि जिम कॉर्बेट नामक व्यक्ति का इसके विकास में अहम योगदान रहा । इसका विकास बंगाल बाघ की सुरक्षा के लिए  1936 में हुआ । जो उत्तराखंड के नैनीताल और रामनगर जिले के पास स्थित है।

2.मेलाघाट अभ्यारण्य(महाराष्ट्र)-

मेलघाट को बाघ की सुरक्षा के लिए 1973-74 के लगभग कुछ टाइगर को छोड़ कर अभ्यारण्य का विकास किया गया था । यही से ताप्ती नदी निकलती है । और सतपुड़ा पर्वत माला भी यही है ।

3.सुंदरवन अभ्यारण्य (पश्चिम बंगाल)-

यह पश्चिम बंगाल के डेल्टा के क्षेत्र में स्थित है जहाँ गंगा नदी और समुद्र का पानी मिलता है । यहाँ हमेशा बारिस होता रहता है । यहाँ खासतौर पर रॉयल बंगाल टाइगर को बचाने के लिए किया गया था । इस समय इनकी सख्या 100 के पार है । यह कई प्रकार के जानवर रहते है ।जैसे खारे पानी के मगरमच्छ , सरीसृप ,बिना रीढ़ के जीव , अनेक पक्षियां आदि। यह 1977 में अभ्यारण्य घोसित हुआ और फिर बाद में 4 मई 1984 को राष्ट्रीय उद्यान(national park) घोसित हुआ।

4.डम्फा अभ्यारण्य (मिजोरम)-

यह पश्चिम बंगाल के मिजोरम के पहाड़ियों पर स्थित है जो 800 से 1000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह बाघ के संरक्षण के लिए बनाया गया है । 

5. दुधवा  अभयारण्य ( उत्तरप्रदेश)- 

यह उत्तर प्रदेश और नेपाल की सीमा पर स्थित 490 वर्ग किमी में फैला है जो लखीमपुर खीरी जिले में स्थित है। यह अभ्यारण्य बाघ और बारह सिंगा के लिए प्रसिद्ध हैं । यज 1977 में अभ्यारण्य के रूप में घोषित हुआ । इसके स्थापना के समय इसमे बाघ,तेंदुआ, चीतल, लकड़बग्घा, नीलगाय, कृष्णमृग, साम्भर , भेड़िया , सियार, गैंडा हाथी आदि जन्तु थे।

गिर अभ्यारण्य- गुजरात
पीलीभीत अभ्यारण्य -उत्तर प्रदेश
मानस अभ्यारण्य - असम
रणथम्भौर अभ्यारण्य - राजस्थान
पलामू अभ्यारण्य - झारखंड
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान
टाडोवा अंधेरी अभ्यारण्य- महाराष्ट्र
बक्सा अभ्यारण्य- पश्चिम बंगाल
बतला अभ्यारण्य- झारखंड
पेरियार अभ्यारण्य - केरल
मुंडनथुरिया कलाकड - तमिलनाडु
भद्रा अभ्यारण्य - कर्नाटक
सरिस्का अभ्यारण्य - राजस्थान
बाल्मिकी अभ्यारण्य - बिहार
इन्द्रावती अभ्यारण्य- छत्तीसगढ़