चट्टान(Rocks) 

चट्टान पृथ्वी के भू- पर्पटी को ही कहते है इसको दूसरे शब्दों में शैल के नाम से जानते है । चट्टान शब्द का अर्थ ही होता है कठोर । चट्टान के अंतर्गत पत्थर, खनिज पदार्थ,मिट्टी,कंकर, धातु, कोयला, बालू, आदि । ऐसा जो भी पृथ्वी के ऊपर या नीचे है वह सब चट्टानों के अंतर्गत आते है। यदि हम किसान के खेत की मिट्टियों को चट्टान कहे तो गलत नही है क्योंकि चट्टाने  मुलायम भी होती हैं।  इसके अंतर्गत पृथ्वी के सभी  कठोर बर्फ़ को भी चट्टानों के अंतर्गत  रखते है। क्योंकि अंटार्कटिका महाद्वीप, हिमालय हमेशा बर्फ़ से लदे होते है।  पृथ्वी के उपरी भाग को पपड़ी या क्रस्ट के नाम से जानते है । उसके बाद सभी आन्तरिक भाग आते है ।पृथ्वी का केन्द्र भाग में  पृथ्वी के अंदर मुलायाम कठोर तथा अतिकठोर भी पदार्थ  पाये जाते है इसप्रकार  इन चट्टानों के  स्वरूप या बनावट के आधार पर इन्हें मुखयत तीन भागो में विभाजित किया जा सकता है।

*     चट्टान तथा शैल दोनो का अर्थ एक है । चट्टान का अर्थ है कठोर।




  • चट्टानों के अंतर्गत कठोर या मुलायाम मिट्टियाँ, पत्थर, बालू , टीला, खनिज पदार्थ (जैसे- कोयला, हीरा,ग्रेफाइट, कच्चे धातुयें आदि)  आती है।
  • चटटानों की प्रकृति के आधार पर इन्हें तीन भागों में  divide किया जा सकता है जैसे - आग्नेय , परतदार तथा रूपांतरित या कायांतरित  चटटाने।
  • चट्टानों में भी कई प्रकार के चट्टान हो  सकते है। जैसे -
  1. पत्थरों में  परतदार पत्थर, समानरूप से कठोर पत्थर , कंकरीले पत्थर आदि।
  2. मिट्टियों में मुलायम मिट्टी, कठोर मिट्टी, बलुई मिट्टी ग्रेनाइट मिट्टी(जिसमे छोटे छोटे कंकण मिले होते हैं) आदि।
  3. खनिजो में कोयला ,हीरा , ग्रेफाइट(काला पदार्थ जो छोटे बैटरियों में होता है), अशुद्ध धातुये आदि ।


                      चट्टानों के प्रकार (Type of Rocks)

चटटानों को उनके  बनावट या प्रकृति के आधार पर मुखयतः तीन भागों में विभाजित किया जाता है। 

  1. आग्नेय शैल/चट्टान(Igneous Rocks)
  2. परतदार या अवसादी चटटाने(sedimentary Rocks)
  3. रूपांतरित या कायांतरित चटटाने(Metamorphic Rocks)
         



  1. आग्नेय चट्टाने(Igneous Rocks)-  आग्नेय शब्द लैटिन(Latin) भाषा जो कि पहले यूरोपीय भाषा है इससे इग्निस(ignis) से लिया गया है । जिसका अर्थ है आग ( ताप)। इन्हें आग्नेय चट्टान इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये ज्वालामुखी के द्वारा निर्मित मिट्टी होती है। यह मिट्टी जब ठंडा होती है तब यह आग्नेय  शैल या चटटाने कहलाती है।  यह चटटाने दानेदार ,कठोर होती है।
जब ज्वालामुखी द्वारा गर्म मिट्टी /लावा बाहर निकलती है तो इसमें जीवाश्म नही पाये जाते तथा ठंडा होने पर आग्नेय चट्टान कहलाती है।तथा इसमे पृथ्वी के अंदर से अनेक खनिज पदार्थ  जैसे- लोहा ,ऐलुमिनियम, चाँदी, अभ्रक  आदि भी बाहर निकल आते है। 

Note- जीवाश्म , जिस  मिट्टियों में जीव जंतुओं के हड्डि या कंकाल उपस्थित हो ।तथा उनके अंश उपस्थित हो उसे जीवाश्म कहते है।
  • जब ज्वालामुखी फटने वाला होता है तो जो भाग अंदर होता है उसे मैग्मा कहते है।जब बाहर निकल जाता है तो वही लावा कहलाता है 
  • ज्वालामुखी से निकले एक ही प्रकार की आग्नेय चटटाने नही होती इनके अलग अलग रूप है।  क्योंकि ज्वालामुखी एक ही प्रकार की हर जगह मिट्टी / लावा बाहर नही निकलती है।
  • इनके रूप,रंग, आकर तथा प्रकृति के आधार पर इनका अलग नाम है जैसे- ग्रेनाइट, बेसाल्ट, गैबरो,डायोराइट, पैग़मेटाइट, कायनाइट,कोडरमा, बैथोलिथ, सिल, डाइक, लैपोलिथ, फैकोलिथ आदि नामो से जानते है। 
  •  यह शैले  परतो के रूप में नही होती है बल्कि यह आपस मे बँधी होती है। 

  1. ग्रेनाइट शैले -  ऐसी शैले जब धरती से बाहर निकलती है तो ठंडा हिने पर इसमे छोटे छोटे कंकण होते है। जो साफ़ दिखाई देता है। जिसे ग्रेनाइट शैल कहतेहै।
  2. बेसाल्ट चटटाने- इस प्रकार की चट्टाने जो ग्रेनाइट की ही तरह होती है और यह काले रूप में हो जाती है क्योंकि इसमें लोहे की अर्क बहुत होती है जो कृषि योग्य हो जाती है जिसमे कपास आदि बोये जाते है।
  3. लैकोलिथ- जब पृथ्वी के अंदर से मिट्टी  निकलती है तो बाहर जमकर गोल आकार में गुम्बद की तरह दिखती है ।
  4. बैथोलिक-  इस चट्टानों के निर्माण तब होता है जब ज्वालमुखी से निकली मैग्मा धरती पर चपटे आकर में जम जाती है । जो ग्रेनाइट के द्वारा ही बनता है।
  5. कोडरमा- इस प्रकार की चटटाने रंग बिरंगे होती है और कठोर होने के साथ रेशेदार भी होती है।
  6. सिलिकेट- सिलिकेट से तात्पर्य उस मिट्टी से है जिसमे खनिज पदार्थ जैसे- लोहा, तांबा, अभ्रक, आदि होते है।
  7. डाइक,सिल- इन चटटानों का निर्माण  अलग अलग आकृति में जम जाने से होता है और कोई अंतर नही है।

  1. परतदार या अवसादी चटटाने(Sedimentary Rocks)- 
आप को इसके अर्थ से ही स्पष्ट हो रहा है कि जो चटटान एक के ऊपर एक परत के रूप में होती है उसे परतदार या अवसादी चटटाने कहते है।जैसे -बालू का पत्थर 
,हिमालय ठोस बर्फ़, चाक या खड़िया मिट्टी आदि।
इन परतो का निर्माण तब होता है जब बरसातों में मिट्टियों तथा मरे हुए जीव जंतुओं का हड्डी ,कंकाल जब सड़ गलकर एक साथ इकट्ठे होते है तो यह धीरे-धीरे जमने लगती है। और  ये सब एक के ऊपर एक होकर कठोर रूप में आ जाती है जो बाद में परतदार या अवसादी चट्टाने  कहलाती है।






  • विश्व के 3/4 भाग पर परतदार चट्टानों या शैलो का क्षेत्र है। कोयला भी एक परतदार शैल है।                                                                                               
  • भारत का लाल किला बलुआ पत्थर से बना है। जो कि परत दार शैलो का उदाहरण हैं। अक्सर पहले की सभी पत्थरो वाली इमारत परदार शैलो या चट्टानों से बनी है
  • मंदिरो में  पत्थरों की मूर्ति बनाने के लिए जो पत्थर प्रयोग होता है वह परतदार पत्थर होते है।
  • खनिज तेल ,जिस खान में पायी जाती है ।वह भी परतदार शैले ही होती है।
परतदार शैलो में मुख्य चट्टान - बालू का पत्थर, चुने का पत्थर ,खड़िया (चाक),कोयला, डोमोमाइट,चीका मिट्टी आदि।
  • यह मिट्टी भंगुर(तोड़ने पर खंड-खंड)  होती है इसमें जीवाश्म होते है । 

  1. बालू का पत्थर - इस प्रकार की शैलो का निर्माण महीन बालू के कणों तथा मिट्टियों का जब जल से सम्पर्क होता है तो बालूका पत्थर का निर्माण होता है। ये पत्थर कई रंग के होते है । जैसे दिल्ली का लाल किला , मंदिरों में काले रंग का पत्थर आदि इसी के रूप है।
  2. चूने का पत्थर-  चुने का पत्थर भी मिट्टी में  सड़े -गले  जब जंतुओं तथा मिट्टी की संपर्क से होता है । यह सीमेंट के निर्माण में भी प्रयोग किया जाता है । क्योंकि इसमें अनेक खनिज पदार्थ जैसे कैल्शियम कार्बोनेट , अभ्रक आदि मिले होते है । इसे लाइम स्टोन (Lime Stone)के भी नाम से जानते है। 
  3. खड़िया या चाक- यह परतो के रूप में होता है। जिसमे कैल्शियम कार्बोनेट की मात्रा होती है । यह सफेद रंग का भी होता है। यह कठोर तथा नर्म दोनों प्रकार का होता है। 
  4. अवसादी मिट्टी- यह भी परतों के रूप में एक प्रकार की मिट्टी होती हैं। जो कठोर होती है  इस यह सबसे अंतिम का परत होता है। 



  1. रूपान्तरित या कायांतरित  चटटाने( Metamorphic Rocks)
रूपांतरित चटटानो से तात्पर्य उस चट्टानों से है । जो चट्टान समय के साथ अपने रूप रंग ,आकार तथा प्रकृति में परिवर्तित हो जाते हैं।अर्थात अन्य चटटाने जब दूसरे रूप में बदल जाते है तब उसे रूपांतरित  चटटान कहते है। रूपांतरित का अर्थ ही होता है रूप परिवर्तन।
जैसे - कोई कच्ची ईट जो चट्टान है उसे जब पका देते है तो वह पक्की ईट में बदल जाता है। जिसका रूप ,रंग तथा प्रकृति बदल जाता है । जो कि एक कायांतरित चट्टान का उदाहरण।

कायान्तरित चट्टानों का निर्माण ताप, दाब एवं रासायनिक प्रक्रियाओ के फलस्वरूप होता है। कायान्तरित चट्टानों के एक विशेष पहचान यह है कि यह कठोर तथा सघन रूप में होता है। इसका निर्माण आग्नेय तथा परतदार शैलो से होता है। 


Note-चट्टानों के अंतर्गत  सभी कठोर पदार्थ जैसे -मिट्टी, पत्थर, खड़िया, हीरा, ग्रेफाइट, सभी धातुएँ, कोयला, चीका मिट्टी, लावा मिट्टी, बालूका पत्थर, चॉक ,स्लेट, संगमरमर , चूना पत्थर  आदि  सभी चट्टानों के अंतर्गत आते है।


ताज महल संगमरमर से बना है जो कि एक कायान्तरित चट्टान है  ।

यह डोमोमाइट (परतदार शैल) का रूपांतरण संगमरमर है।
            मूल शैल/ चट्टान                           कायान्तरित चट्टान
    ग्रेनाइट (आग्नेय)                                   निस
    बेसाल्ट (आग्नेय)                                 ऐंफिबोलाइट
बालूका पत्थर (परतदार शैल)                     क्वार्ट्जाइट
कोयला(परतदार शैल)                               ग्रेफाइट
स्लेट( रूपांतरित शैल)                            शिस्ट
शिस्ट (रूपांतरीत)                              फैलाइट



Note-  यदि किसी चट्टान का रूपांतरण हो गया है तो वह उसी रूप में हमेशा नही रहेगा उसका फिर से किसी दूसरे रूप में रूप परिवर्तन हो सकता है ।